Operating System Kya Hota Hai

Operating System Kya Hota Hai :- ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा प्रोग्राम है जो कंप्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को नियंत्रित करता है। कम्प्यूटर सिस्टम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों से मिलकर पूर्ण होता है। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक-दूसरे के पूरक हैं।

हार्डवेयर द्वारा कार्य कराने के लिए प्रयोगकर्त्ता को निर्देश देने होते हैं। ये निर्देश सॉफ्टवेयर की सहायता से दिए जाते हैं। सॉफ्टवेयर अनेक प्रकार के होते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम, सिस्टम सॉफ्टवेयर की श्रेणी में आता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर पर सर्वप्रथम संग्रहीत होने वाला सॉफ्टवेयर होता है जो एक नियंत्रक के रूप में कम्प्यूटर पर सम्पन्न होने वाले सभी कार्यों को नियन्त्रित करता है।

यह कम्प्यूटर पर उपस्थित सॉफ्टवेयर को नियन्त्रित करने के अतिरिक्त कम्प्यूटर के विभिन्न हार्डवेयर को भी नियन्त्रित करता है।

इसका प्रमुख कार्य प्रयोगकर्त्ता और कम्प्यूटर सिस्टम के मध्य सम्बन्ध स्थापित करना है। कम्प्यूटर सिस्टम में हार्डवेयर को दिये गये निर्देश मशीनी भाषा में होते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम प्रयोगकर्त्ता द्वारा प्रदत्त निर्देशों को हार्डवेयर के अनुरूप परिवर्तित कर देता है।

उदाहरणार्थ, यदि कोई सॉफ्टवेयर जैसे एम० एस० वर्ड को प्रारम्भ करना चाहते हैं तो आप इसके लिए निर्देश लिखते हैं जो कम्प्यूटर सिस्टम के पास पहुँचता है, यदि एम० एस० वर्ड कम्प्यूटर पर उपलब्ध होता है तो यह उसे क्रियान्वित होने के आदेश देता है ।

अतः हम कह सकते हैं कि ऑपरेटिंग सिस्टम एक कण्ट्रोल प्रोग्राम है। यह कम्प्यूटर के ऑन होने के बाद सबसे पहले मैमोरी में संग्रहीत हो जाता है।

हम जो भी निर्देश कम्प्यूटर को देते हैं, कम्प्यूटर उन्हें ऑपरेटिंग सिस्टम के माध्यम से पूरा करता है ।

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Operating System Kya Hota Hai

ऑपरेटिंग सिस्टम

ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर के हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर को नियंत्रित करता है। उपयोगकर्त्ता उसे जो निर्देश देता है, ऑपरेटिंग सिस्टम उसको पूरा करने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में सामंजस्य स्थापित करता है और उस निर्देश का पालन कराकर उसका परिणाम उपयोगकर्त्ता तक पहुँचाता है।

हमारे लिए ऑपरेटिंग सिस्टम का बहुत महत्त्व है, क्योंकि यह बहुत से ऐसे कार्यों को सँभाल लेता है, जिन्हें करने से हमारा बहुत सो बहुमूल्य समय एवं श्रम बेकार चला जाएगा।

वास्तव में ऑपरेटिंग सिस्टम अनेक सॉफ्टवेया का एक समूह है, जिसको सहायता से कम्प्यूटर सिस्टम की समस्त गतिविधियों पर नियन्त्रण किया जा सकता है।

Operating System Kya Hota Hai

ऑपरेटिंग सिस्टम किसी भी कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर का सबसे महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य अंग है। इसका कार्य कई प्रकार का होता है।

एक ओर तो यह कम्प्यूटर के सभी भागों पर नियन्त्रण रखकर उनमें उचित सामंजस्य स्थापित करता है तथा उनसे अच्छे-से-अच्छा कार्य लेता है, तो दूसरी ओर यह उपयोगकर्त्ता द्वारा दिये गये आदेशों को समझकर उनका पालन कराता है और प्रोग्रामों को चलाता है।

हम अपने सभी कार्यों के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम पर इतने अधिक निर्भर रहते हैं कि उसके बिना कम्प्यूटर की कल्पना करना ही कठिन है।

वास्तव में सभी कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टमों के नियन्त्रण में ही कार्य करते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना कम्प्यूटर से कोई कार्य कराना हमारे लिए असम्भव है ।

ऑपरेटिंग सिस्टम की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है- ऑपरेटिंग सिस्टम निर्देशों का एक समूह है जो कम्प्यूटर में मास्टर कण्ट्रोल प्रोग्राम के रूप में कार्य करता है एवं प्रयोक्ता, हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर संसाधनों के मध्य सम्पर्क स्थापित करता है।

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Operating System के कार्य

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं :-

  • कम्प्यूटर को स्टार्ट करना
  • यूटिलिटी प्रोग्राम को रन करना
  • सुरक्षा प्रबन्धन
  • संसाधनों का वितरण

(1) कम्प्यूटर को स्टार्ट करना : अधिकतर माइक्रो कम्प्यूटर में बूट लोड प्रोग्राम, वायस तथा डायग्नोस्टिक टैस्ट प्रोग्राम रोम (ROM) में स्टोर रहते हैं; जो कम्प्यूटर चालू करते ही प्रयोगकर्त्ता को उपलब्ध होते हैं ।

(2) यूटिलिटी प्रोग्राम को रन करना : कोई भी ऐप्लीकेशन प्रोग्राम रन करने के लिए प्रयोगकर्त्ता की- बोर्ड से टाइप करके ऐप्लीकेशन के रन होने वाले प्रोग्राम पर क्लिक करके कम्प्यूटर को कमाण्ड देता है।

(3) सुरक्षा प्रबन्धन : एक ऐसे कम्प्यूटर सिस्टम में जिनका अनेक प्रयोगकर्त्ता साझा प्रयोग कर रहे हैं; तीन प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक होती है-

(i) इनपुट और आउटपुट सुरक्षा : इनपुट / आउटपुट कण्ट्रोल सिस्टम कम्प्यूटर को इनपुट / आउटपुट युक्तियों तथा भण्डारण युक्तियों को नियन्त्रित करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम आदेश को चैक करता है कि वह पूरा करने योग्य है या नहीं। यदि है तो उसका सुपर वाइजर प्रोग्राम इनपुट / आउटपुट ऑपरेशन करता है और पुन: कंट्रोल प्रयोगकर्ता को दे देता है।

(ii) प्रोसेसर सुरक्षा : प्रोसेसर की सुरक्षा के लिए एक टाइमर का प्रयोग किया जाता है। के टाइमर के द्वारा किसी एक प्रोग्राम को सी०पी०यू० उपयोग करने का समय निश्चित कर लिया जाता है। यह समय समाप्त होने पर चाहे प्रोसेसिंग पूरी हुई हो अथवा न हुई हो, कण्ट्रोल ऑपरेटिंग सिस्टम के पास वापस आ जाता है।

(iii) संसाधनों का प्रवन्धन : कम्प्यूटर के संसाधनों का इस प्रकार प्रबन्ध करना कि वे अधिक उपयोगी और लाभकारी सिद्ध हो सकें, ऑपरेटिंग सिस्टम की जिम्मेदारी है। संसाधनों को कम्प्यूटर पर रन हो रहे प्रोग्रामों में वितरित करना, उनके मध्य सामंजस्य स्थापित करना, उनके ऑपरेशनों को नियन्त्रित करना तथा ऐसी तकनीक लागू करना जिससे संसाधनों का पूर्णरूपेण उपयोग हो और उनकी कार्य कुशलता में वृद्धि हो ।

(4) संसाधनों का वितरण : ऑपरेटिंग सिस्टम ही इनपुट आउटपुट युक्तियों, मेमोरी, सी०पो०यू० आदि के मध्य सामंजस्य स्थापित करता है तथा कम्प्यूटर पर चल रहे सैकड़ों प्रोग्रामों को प्राथमिकता के आधार पर वितरित करता है। इसके अतिरिक्त ऑपरेटिंग सिस्टम अनेकों प्रयोगकर्त्ता तथा प्रयोगकर्ता प्रोग्रामों को कम्पाइलर, असेम्बलर, लिंकर, लोडर, यूटिलिटी प्रोग्राम तथा अन्य एप्लीकेशन एवं सिस्टम सॉफ्टवेयर आदि वितरित करता है और इन सॉफ्टवेयर संसाधनों के मध्य सामंजस्य स्थापित करता है ताकि ये प्रोग्राम एक-दूसरे से सम्पर्क कर कार्य कर सकें ।

Operating System के प्रकार

Operating System के निम्नलिखित प्रकार में विभाजित किया जा सकता है-

  1. सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम
  2. मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम
  3. मल्टीप्रोसेसिंग
  4. बैच प्रोसेसिंग

(1) सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Single User Operating System): सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम एक समय में केवल एक ही प्रयोगकर्ता द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करने में सक्षम होता है और एक समय में केवल एक ही कार्य कर सकता है; जैसे-डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम । Ve

(2) मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi User Operating System) : मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम एक समय में एक से अधिक प्रयोगकर्त्ता के आदेशों का पालन करने में सक्षम होता है और एक से अधिक प्रोग्रामों के क्रियान्वयन की सुविधा प्रदान करता है। इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण यूनिक्स, विण्डोज एन०टी० आदि हैं।

(3) मल्टीप्रोसेसिंग (Multiprocessing): मल्टीप्रोसेसिंग शब्द का प्रयोग एक प्रोसेसिंग दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है, जहाँ पर दो अथवा अधिक प्रोसेसर परस्पर जुड़े रहते हैं। इस प्रकार के सिस्टम में भिन्न एवं स्वतंत्र प्रोग्रामों के निर्देश एक ही समय में एक से अधिक प्रोसेसरों द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं अथवा प्रोसेसरों द्वारा विभिन्न निर्देशों का क्रियान्वयन क्रमश: किया जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम का ही कार्य है कि वह इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसिंग क्षमताओं के मध्य उचित सामंजस्य स्थापित करे।

(4) बैच प्रोसेसिंग (Batch processing) : वैच प्रोसेसिंग एक बहुत पुराना तरीका है जिसके माध्यम से विभिन्न प्रोग्रामों को क्रियान्वित किया जा सकता है और इसका प्रयोग विभिन्न डाटा प्रोसेसिंग सेंटर पर कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए किया जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम की यह तकनीक औटोमैटिक जॉब परिवर्तन के सिद्धान्त पर आधारित है। ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रत्येक यूजर अपने प्रोग्राम को ऑफ लाइन तैयार करता है तथा कार्य पूरा हो जाने पर उसे डाटा प्रोसेसिंग सेन्टर पर संग्रहीत करा देते हैं। एक कम्प्यूटर ऑपरेटर उन सारे पोग्रामों को एकत्र करता है जो कि एक कार्ड पर पंच रहते हैं। जब ऑपरेटर प्रोग्रामों के बैच को एकत्र कर लेता है तब वह उस बैच को कम्प्यूटर में लोड कर देता है और फिर उन प्रोग्रामों को क्रमशः नस्टम कियान्वित किया जाता है। अन्त में ऑपरेटर उन कार्यों के प्रिण्टेड आउटपुट को प्राप्त करते हैं नोडर, एवं उन आउटपुटरों को सम्बन्धित यूजरों को प्रदान कर दिया जाता है।

प्रोग्राम कम्प्यूटर को चलाने, उसको नियन्त्रित करने, उसके विभिन्न भागों की देखभाल करने और उसकी सभी क्षमताओं का अच्छे – से – अच्छा उपयोग करने के लिए लिखे जाते हैं, उनको सम्मिलित रूप में ‘सिस्टम सॉफ्ट वेयर’ कहते हैं।

सामान्यतया सिस्टम सॉफ्ट वेयर कम्प्यूटर के निर्माता द्वारा ही उपलब्ध कराया जाता है। बाद में यह बाजार से भी खरीदा जा सकता कम्प्यूटर से सम्पर्क सदैव सिस्टमसॉफ्टवेयर के माध्यम से ही हो पाता है।

दूसरे शब्दों में, कम्प्यूटर सदैव सिस्टम सॉफ्टवेयर के नियन्त्रण में रहता है, जिससे हम सीधे सिस्टम सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर से अपना सम्पर्क नहीं बना सकते।

वास्तव में हमें उसकी आवश्यकता भी नहीं है, क्यों कि सिस्टम सॉफ्टवेयर उपयोगकर्त्ता कीसुविधा के लिए ही बनाया जाता है । कम्प्यूटर एवं सिस्टम सॉफ्टवेयर के सम्बन्ध को चित्र 6-1 में दिखाया गया है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर से हमें बहुत सुविधा हो जाती है, क्योंकि वह कम्प्यूटर को अपने नियन्त्रण में लेकर हमारे द्वारा बताये गये कार्यों को कराने और प्रोग्रामों का सही-सही पालन कराने का दायित्व अपने ऊपर ले लेता है ।

कुछ प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम

सामान्य रूप से प्रचलित कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम निम्नलिखित हैं :-

  1. विण्डोज 95, 98, 2000, एम ई, एक्स पी
  2. डॉस
  3. यूनिक्स
  4. लाइनेक्स
  5. विण्डोज एन टी
  6. ओ एस-2

(1) विण्डोज 95, 98, 2000, एम ई, एक्स पी : ये माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाये गये डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम हैं, जो मुख्यत: पर्सनल कम्प्यूटर के लिए प्रयुक्त होते हैं।

(2) डॉस : यह डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो सिंगल यूज़र सिस्टम है।

(3) यूनिक्स : यह प्रमुख रूप से नेटवर्किंग के लिए प्रयुक्त होने वाला एक ऑपरेटिंग सिस्टम है।

(4) लाइनेक्स : यह यूनिक्स का विकसित संस्करण है, जिसका प्रयोग यूनिक्स के स्थान पर प्राय: किया जाता है।

(5) विण्डोज एन टी : यह माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाया गया एक अन्य प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो नेटवर्किंग की सुविधा प्रदान करता है।

(6) ओ एस-2 : यह आई० बी० एम० द्वारा बनाया गया ऑपरेटिंग सिस्टम है।

Disk Operating System क्या है

यह एक प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसका पूरा नाम माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम है। अगस्त, 1981 में माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन, अमेरिका ने इसे तैयार किया था।

यह ऑपरेटिंग सिस्टम हार्ड डिस्क पर संग्रहीत रहता है और कम्प्यूटर के ऑन होते ही सर्वप्रथम मैमोरी में संग्रहीत हो जाता है।

सन् 1983 में जब हार्ड डिस्क युक्त माइक्रो कम्प्यूटर विकसित किये गये, तब MS-DOS 2.0 का संस्करण बाजार में आया।

इस ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा एक ही डिस्क पर अनेक फाइलों को संग्रहीत करने की सुविधा हो गई। साथ ही फाइल डाइरेक्टरी के सिद्धान्त का चलन हुआ।

सन् 1984 में प्रोसेसेर युक्त माइक्रो कम्प्यूटर विकसित किये गये, तब MS-DOS 3.0 एवं MS-DOS 4.0 संस्करणों का विकास किया गया।)

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम हमें कम्प्यूटर में फाइल्स, फोल्डर आदि पर नियन्त्रण रखने एवं विभिन्न संसाधनों, जैसे- प्रिण्टर, मॉनीटर, माउस, की-बोर्ड आदि को भी जाँचकर पूरे कम्प्यूटर पर नियन्त्रण करने में सहायता करता है।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम हे अर्थात् एक समय पर डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम एक ही प्रयोगकर्ता के निर्देशों का पालन करता है।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसमें की-बोर्ड द्वारा टाइप करके कमाण्ड दी जाती है; अतः प्रयोगकर्त्ता के लिए यह आवश्यक है कि कमाण्ड लिखने से पूर्व प्रयोगकर्त्ता को कमाण्ड की पूरी जानकारी हो, क्योंकि सभी कार्य कमाण्ड की सहायता से किए। जाते हैं ।

Disk Operating System की कार्य-प्रणाली

(FUNCTIONING OF DOS) डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम के अन्दर कुछ ऐसे मौलिक नियम अथवा निर्देश निहित होते हैं. जो सभी प्रोग्राम्स को मानने पड़ते हैं।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य कम्प्यूटर ऑन करने के तुरन्त बाद प्रारम्भ हो जाता है। जैसे ही हम कम्प्यूटर ऑन करते हैं, कम्प्यूटर यह जाँच करता है

कि उसके सभी आन्तरिक उपकरण; जैसे-रैम, रोम, विभिन्न संलग्नक यन्त्रः जैसे की-बोर्ड, माउस, मॉनीटर आदि ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। यह जाँच हो जाने के बाद ऑपरेटिंग सिस्टम स्वतः लोड हो जाता है।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है ।

Disk Operating System के कार्य

Disk Operating System के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

  1. सेण्ट्रल प्रॉसेसिंग यूनिट एवं स्मृति जैसे हार्डवेयर के संचालन पर नियन्त्रण
  2. यह निर्धारित करना कि किस प्रोग्राम के लिए कितनी स्मृति चाहिए और उसके लिए स्मृति उपलब्ध कराना
  3. इनपुट डिवाइस से सूचना प्राप्त करना और उसको मॉनीटर पर प्रदर्शित करना ।
  4. संलग्नक यन्त्रः जैसे—प्रिण्टर आदि के संचालन को नियन्त्रित करना
  5. नई फाइल का निर्माण करना, पुरानी फाइल की समाप्ति और फाइल को नया नाम देना ।
  6. डिस्क की संचय क्षमता में वृद्धि कर दोगुनी करना ।
  7. नई फ्लॉपी डिस्क को फॉर्मेट करना।
  8. डिस्क में संचित फाइल्स की सूची प्राप्त करना
  9. डिस्क की सचित फाइल्स को पुनः संगठित करना
  10. हार्ड डिस्क से फ्लॉपी डिस्क पर फाइलों को स्थानान्तरित करना।
  11. वाइरस की खोज करना तथा उसको नष्ट करना।

Windows Operating System क्या है

विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम भी माइक्रोसॉफ्ट कार्पोरेशन द्वारा बनाया गया है। सन् 1995 में बनाये गए विण्डोज 95 ऑपरेटिंग सिस्टम ने कम्प्यूटर जगत में अभूतपूर्व क्रान्ति ला दी ।

विण्डोज 95 के अलावा विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम के अन्य वर्जन विण्डोज 98, एम० ई० 2000, एक्स पी तथा विण्डोज एन०टी० हैं ।

विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रमुख विशेषता ग्राफिकल यूजर इण्टरफेस को सपोर्ट करना है। इसका अर्थ यह है कि डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम के विपरीत विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम में ग्राफिकल आइकन एवं माउस विण्डोज का प्रयोग किया जाता है।

यह इण्टरफेस प्रयोगकर्त्ता के लिए अत्यन्त आसान है तथा प्रयोगकर्त्ता को कमाण्ड याद करने की आवश्यकता नहीं होती है।

जिस प्रकार डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम में कमाण्ड की सहायता से कार्य किए जाते हैं, विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम में वही कार्य माउस द्वारा क्लिक करके सम्पादित किए जाते हैं।

विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ संस्करण; जैसे— 95, 98, एम० ई०, सिंगल यूजर, यूनिटास्किंग सिस्टम हैं तथा अन्य कुछ संस्करण; जैसे—विण्डोज एन०टी०, 2000 मल्टीयूजर एवं मल्टीटास्किंग सिस्टम हैं ।

Linux Operating System क्या है?

लाइनक्स 32-बिट का ऑपरेटिंग सिस्टम है । यह एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो व्यावसायिक कार्यों, शिक्षा एवं व्यक्तिगत कार्यों के लिए समान रूप से कार्य कर सकता है।

इसकी दूसरी मुख्य विशेषता इसका निःशुल्क होना है। आज इण्टरनेट के माध्यम से कई स्रोतों द्वारा, जिन्हें डिस्ट्रीब्यूशन कहते हैं, पूरे विश्व में लाइनक्स उपलब्ध है।

लाइनक्स एक सशक्त एवं दक्ष ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में सामने आया है। यह घर के पर्सनल कम्प्यूटर से लेकर कॉरपोरेट जगत की आवश्यकताओं को पूरा करने में पूर्णत: सक्षम है।

लाइनक्स’ शब्द का प्रयोग पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए किया जाता है। यह प्रोग्राम एक मुक्त 32 बिट वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है। लाइनक्स को विकसित करने का श्रेय लाइनस टॉरवाल्ड्स को दिया जाता है। उन्होंने 5 अक्टूबर, 1991 को लाइनक्स का प्रथम संस्करण रिलीज किया।

लाइनस टॉरवाल्ड्स ने इस संस्करण को स्वयं हैलसिंकी यूनिवर्सिटी, फिनलैण्ड में विकसित किया। इसके बाद इण्टरनेट के माध्यम से तथा अनेक यूनिक्स भाषा के प्रोग्रामरों की सहायता से लाइनक्स के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

वर्तमान समय में लाइनक्स का ट्रेडमार्क लाइनस टॉरवाल्ड्स के पास है, लेकिन लाइनक्स करनैल एवं इससे सम्बन्धित लगभग समस्त सॉफ्टवेयर GNU जनरल पब्लिक लाइसेन्स के अन्तर्गत सभी के लिए उपलब्ध हैं। लाइनक्स को GNU जनरल पब्लिक लाइसेन्स के अन्तर्गत डिस्ट्रीब्यूट किए जाने का एक सुखद परिणाम यह हुआ कि विश्व के अनेक कम्प्यूटर विशेषज्ञों ने अपने-अपने स्तर पर इसके विकास एवं सुधार की दिशा में शोध कार्य करना प्रारम्भ कर दिया ।

परिणामस्वरूप लगभग एक दशक में हो; यह विश्व में सर्वाधिक प्रयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया। लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के अन्तर्गत जहाँ एक ओर सॉफ्टवेयर एवं फाइल सिस्टम को और अधिक उन्नत बनाया गया है, वहीं कम्प्यूटर की परिचालन गति में भी पर्याप्त सुधार किया गया है।

इसके अतिरिक्त, इसमें ग्राफिक्स से सम्बन्धित कार्यों को पहले की अपेक्षा और अधिक सुगमता से किया जा सकता है। लाइनक्स के विभिन्न डिस्ट्रीब्यूशन्स आज इतने अधिक प्रचलित एवं उपयोगी सिद्ध हो चुके हैं। कि इनका प्रयोग विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों एवं नासा जैसे संस्थानों में सफलता के साथ किया जा रहा है।

इसमें सन्देह नहीं कि कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के क्षेत्र में लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का उद्भव एक क्रान्तिकारी कदम है।

लाइनक्स का ढाँचा (STRUCTURE OF LINUX)

लाइनक्स में तीन प्रमुख भाग होते हैं:-

(1) कर्नेल (Kernel). (2) वातावरण (Environment) तथा (3) फाइल संरचना (File Structure )

(1) कर्नेल :- कर्नल लाइनक्स का मुख्य भाग होता है, जो अन्य प्रोग्रामों को चलाता है और कम्प्यूटर के समस्त हार्डवेयर को व्यवस्थित करता है।

(2) वातावरण :- वातावरण उपयोगकर्ता एवं कर्नल के मध्य एक इण्टरफेस उपलब्ध कराता है। यह इण्टरफेस उपयोगकर्ता द्वारा दिये गये निर्देशों को ग्रहण करता है और कर्नेल को भेज देता है।

लाइनक्स में अनेक प्रकार के वातावरण उपलब्ध हैं; जैसे- डेस्कटॉप, विण्डो मैनेजर एवं कमाण्ड लाइन शेल्स लाइनक्स सिस्टम में प्रत्येक उपयोगकर्ता का अपना इण्टरफेस होता है, जो वह अपनी आवश्यकतानुसार चयन कर सकता है।

(3) फाइल संरचना:- फाइल संरचना फाइलों को स्टोर करने का कार्य करती है। यह फाइलों को किसी स्टोरेज मीडिया में स्टोर करती है। फाइलों को किसी डायरेक्टरी में ही रखा जाता है। डायरेक्टरी के अन्दर सब-डायरेक्टरी भी हो सकती है, जो फाइलों को अपने अन्दर रखती है।

कर्नल वातावरण एवं फाइल संरचना ये तीनों मिलकर लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का ढाँचा बनाते हैं। इन तीनों की सहायता से प्रोग्राम रन कराये जाते हैं, डाटा को व्यवस्थित रखा जाता है एवं सिस्टम के साथ सम्पर्क स्थापित किया जाता है।

यदि हम अपने कम्प्यूटर को ग्राफिकल यूजर इण्टरफेस में बूट करते हैं, तो लॉग इन करने के पश्चात् सर्वप्रथम हमें डेस्कटॉप दिया जाता है। डेस्कटॉप के दो प्रमुख भाग होते हैं डॅस्कटॉप क्षेत्र तथा डेस्कटॉप पैनल ।

(4)डेस्कटॉप क्षेत्र:- कम्प्यूटर की स्क्रीन के अधिकांश भाग को घेरता है। जब हम कोई उपयोग प्रारम्भ करते हैं, तो इसी में उस उपयोग की विण्डो खुलती है। इसमें डेस्कटॉप आइकॉन भी होते है।

आइकॉन ऐसे छोटे चित्र होते हैं, जो विभिन्न वस्तुओं को निरूपित करते हैं, जैसे-होम (Home) विभिन्न प्रोग्राम (Various programs) देश (Trash) आदि ।

(5)डेस्कटॉप पैनल:- डेस्कटॉप पैनल में एक पट्टी होती है, जो प्रायः हर समय दिखायी पड़ती रहती है। डॅस्कटॉप में एक अथवा अधिक पैनल क्षेत्र हो सकते हैं।

यह हमारी सैटिंग पर निर्भर करता है। पैनल क्षेत्र में प्रोग्रामों के आइकॉन, विशेष बटन, मैल्यू आदि होते हैं। डेस्कटॉप पैनल के सबसे दायें भाग में एक घड़ी भी बनी होती है, जिस पर समय दिखाया जाता है।लाइनक्स पर अनेक प्रकार के डेस्कटॉप उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें से दो प्रमुख हैं|

जीनोम (GNOME) तथा केडीई (KDE) लाइनक्स की विशेषता यह है कि हम कम्प्यूटर को ग्राफिकल यूजर इण्टरफेस में बूट करके भी कमाण्ड लाइन इण्टरफेस में कार्य कर सकते हैं।

Linux हेतु आवश्यक Hardware

लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम को चलाने के लिए निम्नलिखित हार्डवेयर की आवश्यकता होती है—

  1. सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट Pentium MMX या उन्नत संस्करण ।
  2. स्थाई स्मृति – 64 MB तथा अधिक
  3. हार्ड डिस्क – 200 MB तथा अधिक
  4. मॉनीटर- VGA तथा अन्य विकसित प्रकार ।

Linux और Dos में अन्तर

लाइनक्सडॉस
1). लाइनक्स मल्टीटास्किंग सिस्टम है।
2). लाइनक्स सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है।
3). लाइनक्स का आविष्कार लाइनस टॉरवाल्ड्स ने इण्टरनेट के माध्यम से जुड़े अनेक प्रोग्रामर की सहायता से किया ।
4). ग्राफिकल यूजर इण्टरफेस होने की वजह से माउस का प्रयोग किया जा सकता है।
5). लाइनक्स में निर्देश कमाण्ड्स के रूप में. और ग्राफिकल यूजर इण्टरफेस दोनों के प्रयोग से दिए जा सकते हैं।
6). लाइनक्स एक फ्री ऑपरेटिंग सिस्टम है । 7). लाइनक्स केस सिन्सेटिव होता है।
8). लाइनक्स आजकल अत्यधिक प्रचलन में है।
1). डॉस यूनिटास्किंग सिस्टम है।
2). डॉस मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है।
3). डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट कार्पोरेशन द्वारा तैयार किया गया है।
4). डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम में माउस का प्रयोग नहीं किया जाता है।
5). डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम कैरेक्टर यूजर इन्टरफेस को सपोर्ट करता है अर्थात् निर्देश केवल कमाण्ड्स की सहायता से दिए जा सकते हैं।
6). डॉस फ्री नहीं है ।
7). डॉस केस सिन्सेटिव नहीं है ।
8). डॉस का प्रचलन अब कम हो गया है।

Linux और Windows मे अंतर

लाइनक्सविण्डोज
1).लाइनक्स मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है।विण्डोज के कुछ संस्करण 95, 98. एम० ई० सिंगल यूजर तथा कुछ अन्य संस्करण एन० टी०, 2000 मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम हैं ।
2).लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ सोर्स कोड भी उपलब्ध है Iविण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम का सोर्स कोड उपलब्ध नहीं है।
3).लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम अनेक डिस्ट्री ब्यूशन पैकेजों के रूप में उपलब्ध है।विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न संस्करण सभी जगह एक ही रूप में उपलब्ध हैं।
4).लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम में विभिन्न डेस्कटॉप उपलब्ध होते हैं।विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम में एक ही डेस्कटॉप होता है।
5).कोई भी व्यक्ति लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम को अपने अनुरूप परिवर्तित कर सकता है।विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम में परिवर्तन सम्भव नहीं है
6).लाइनक्स के अनुप्रयोग सीमित हैं।विण्डोज के अनुप्रयोग असीमित हैं
7).लाइनक्स इण्टरनेट के द्वारा फ्री उपलब्ध है।विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम फ्री उपलब्ध नहीं है ।
8).लाइनक्स का उपयोग नेटवर्किग की सहायता से किया जाता है।विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम के सभी संस्करण नेटवर्किंग हेतु प्रयोग में नहीं लाए जा सकते हैं।

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पोस्ट से Related FAQ

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ?

ऑपरेटिंग सिस्टम निर्देशों का एक समूह है जो कम्प्यूटर में मास्टर कण्ट्रोल प्रोग्राम के रूप में कार्य करता है एवं प्रयोक्ता, हार्डवेयर एवं सॉफ्ट वेयर संसाधनों के मध्य सम्पर्क स्थापित करता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के क्या कार्य है?

(1) प्रोसेसिंग प्रबन्धन, (2) जॉब प्रबन्धन, (3) इनपुट तथा आउटपुट प्रबन्धन (4) फाइल प्रबन्धन (5) स्मृति प्रबन्धन आदि।

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार

(I) सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम, (2) मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम, (3) मल्टीप्रोसेसिंग, (4) बैच प्रोसेसिंग

सामान्य रूप से प्रचलित कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम

(1) विण्डोज 95, 98, 2000, एम० ई०, एक्स० पी०, (2) डॉस, (3) यूनिक्स, (4) लाइनक्स (5) विण्डोज एन० टी।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?

अगस्त, 1981 में माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन, अमेरिका ने इसे तैयार किया था, यह ऑपरेटिंग सिस्टम हार्ड डिस्क पर संग्रहीत रहता है और कम्प्यूटर के ऑन होते ही सर्वप्रथम मैमोरी में संग्रहीत हो जाता है।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम की कार्य प्रणाली क्या है?

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है। डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम सभी कार्यों को स्वयं नहीं कर सकता। कुछ कार्य वह स्वयं करता है तथा कुछ कार्य इसके द्वारा कराये जाते हैं ।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य क्या है?

यूनिट एवं स्मृति जैसे हार्डवेयर के संचालन पर नियन्त्रण, इनपुट डिवाइस से सूचना प्राप्त करना और उसे मॉनीटर पर प्रदर्शित करना, संलग्न यन्त्रों के संचालन को नियन्त्रित करना आदि।

विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?

सन् 1985 में बनाये गये विण्डोज 95 ऑपरेटिंग सिस्टम ने कम्प्यूटर जगत में अभूतपूर्व क्रान्ति ला दी। विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रमुख विशेषता ग्राफीकल यूजर इण्टरफेस को सपोर्ट करना है।

लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?

लाइनक्स 32-बिट का ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह घर के पर्सनल कम्प्यूटर से लेकर कॉरपोरेट जगत की आवश्यकताओं को पूरा करने में पूर्णतः सक्षम है।

लाइनक्स हेतु आवश्यक हार्डवेयर क्या है?

सेण्ट्रल प्रॉसेसिंग यूनिट, स्थायी स्मृति, हार्ड डिस्क, मॉनीटर आदि।

लाइनक्स एवं डॉस में क्या अन्तर है?

लाइनक्स का आविष्कार लाइनक्स टॉरवाल्ड्स ने इण्टरनेट के माध्यम से जुड़े अनेक प्रोग्रामर की सहायता से किया जबकि डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा तैयार किया गया।

लाइनक्स एवं विण्डोज में क्या अन्तर है?

लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम अनेक डिस्ट्रीब्यूशन पैकेजों के रूप में उपलब्ध है जबकि ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न संस्करण सभी जगह एक ही रूप में उपलब्ध हैं।

सिस्टम सॉफ्टवेयर ?

जो प्रोग्राम कम्प्यूटर को चलाने, उसको नियन्त्रित करने, उसके विभिन्न भागों की देखभाल करने और उसकी सभी क्षमताओं का अच्छे-से-अच्छा उपयोग करने के लिए लिखे जाते हैं, उनको सम्मिलित रूप में ‘सिस्टम सॉफ्टवेयर’ कहते हैं ।

Operating System Kya Hota Hai

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